Hanuman Chalisa Hindi

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November 20, 2019

Kuber Ji Ki Aarti | कुबेर जी की आरती

Kuber Ji Ki Aarti | भगवान कुबेर जी की आरती करने से मनुष्य को कभी भी धन और धान्य की कमी नहीं होती है. एषा धन सम्पति में बृद्धि होती है.

Kuber Ji Ki Aarti


|| कुबेर जी की आरती ||

Kuber Bhagwan Ki Aarti
Kuber Ji Ki Aarti


ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे,
स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे।
शरण पड़े भगतों के,
भण्डार कुबेर भरे।
ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे........

शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,
स्वामी भक्त कुबेर बड़े।
दैत्य दानव मानव से,
कई-कई युद्ध लड़े ॥
ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे........

स्वर्ण सिंहासन बैठे,
सिर पर छत्र फिरे,
स्वामी सिर पर छत्र फिरे।
योगिनी मंगल गावैं,
सब जय जय कार करैं॥
ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे........

गदा त्रिशूल हाथ में,
शस्त्र बहुत धरे,
स्वामी शस्त्र बहुत धरे।
दुख भय संकट मोचन,
धनुष टंकार करें॥
ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे........

भांति भांति के व्यंजन बहुत बने,
स्वामी व्यंजन बहुत बने।
मोहन भोग लगावैं,
साथ में उड़द चने॥
ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे........

बल बुद्धि विद्या दाता,
हम तेरी शरण पड़े,
स्वामी हम तेरी शरण पड़े,
अपने भक्त जनों के,
सारे काम संवारे॥
ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे........

मुकुट मणी की शोभा,
मोतियन हार गले,
स्वामी मोतियन हार गले।
अगर कपूर की बाती,
घी की जोत जले॥
ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे........

यक्ष कुबेर जी की आरती,
जो कोई नर गावे,
स्वामी जो कोई नर गावे ।
कहत प्रेमपाल स्वामी,
मनवांछित फल पावे।
ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे........

॥ इति श्री कुबेर आरती ॥

Kuber Ji Ki Aarti English Lyrics

kuber aarti
Kuber Ji Ki Aarti


Om Jai Yaksh Kuber Hare,
Swaami Jai Yaksh Kuber Hare
Sharan Pade Bhagato Ke,
Bhandaar kuber Bhare ।
Om Jai Yaksh Kuber Hare..........

Shiv Bhakto Me Bhakta Kuber Bade,
Swaami Bhakta Kuber Bade ।
Daitya Daanav Maanav Se
Kai-Kai Yuddh Lade ॥
Om Jai Yaksh Kuber Hare..........

Swarn Sinhaasan Baithe ,
Sir Par Chhatra Phire,
Swaami Sir Par Chhatra Phire ।
Yogini Mangal Gaavain,
Sab Jay Jay Kaar Karain ॥
Om Jai Yaksh Kuber Hare..........

Gada Trishul Haath Me,
Shastra Bahut Dhare,
Swaami Shastra Bahut Dhare ।
Sukh Bhay Sankat Mochan,
Dhanush Tankaar Bhare ॥
Om Jai Yaksh Kuber Hare..........

Bhaanti Bhaanti Ke Vyanjan Bahut Bane,
Swaami Vyanjan Bahut Bane ।
Mohan Bhog Lagaavain,
Saath Me Udad Chane ॥
Om Jai Yaksh Kuber Hare..........

Bal Buddhi Vidyaa Daataa,
Ham Teri Sharan Pade,
Swaami Ham Teri Sharan Pade|
Apane Bhakt Jano Ke,
Saare Kaam Sanvaare ॥
Om Jai Yaksh Kuber Hare..........

Mukut Mani Ki Shobhaa,
Motiyan Haar Gale,
Swaami Motiyan Haar Gale ।
Agar Kapur Ki Baati,
Ghee Ki Jot Jale ॥
Om Jai Yaksh Kuber Hare..........

Yaksha Kuber Ki Aarati
Jo Koi Nar Gaave,
Swaami Jo Koi Nar Gaave ।
Kahat Prempaal Swaami,
Manavaanchhit Phal Paave ।
Om Jai Yaksh Kuber Hare..........


कुबेर आरती के प्रकाशन में सम्पूर्ण रूप से अत्यंत सावधानी राखी गयी है. फिर भी अगर कहीं कोई त्रुटी रह गयी हो तो कृपया हमें निचे कमेंट बॉक्स में लिखें. हम उसे जरुर सुधार करेंगे.

कुबेर आरती पीडीऍफ़ डाउनलोड

कुबेर आरती को पीडीऍफ़ में डाउनलोड करने के लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें. जिससे आप एक नए page पर जायेंगे. जहाँ सबसे निचे आप लोगों को पीडीऍफ़ डाउनलोड का लिंक मिलेगा. जहाँ से आप कुबेर जी की आरती को पीडीऍफ़ में डाउनलोड कर सकतें हैं. साथ हीं इसे आप प्रिंट करके भी रख सकतें हैं.

November 15, 2019

Shri Shyam Chalisa , Shri Khatu Shyam Chalisaखाटू श्याम चालीसा

श्री खाटू श्याम बाबा चालीसा  | Shri Khatu Shyam Chalisa के पाठ करने से मनुष्य को श्री खाटू श्याम जी की अनुपम कृपा की प्राप्ति होती है.
जो भी व्यक्ति सच्चे ह्रदय से खाटू श्याम जी के चालीसा ( Khatu Shyam Chalisa ) का नियमित पाठ करता है. उसे कभी भी किसी भी प्रकार दुखों का सामना नहीं करना पड़ता है. श्याम बाबा सदा उसकी सभी संकटों से रक्षा करतें हैं.

Khatu Shyam Baba Chalisa


श्री खाटू श्याम बाबा चालीसा 

|| दोहा ||


श्री गुरु चरण ध्यान धर, सुमिरि सच्चिदानन्द।
श्याम चालीसा भजत हूँ, रच चैपाई छन्द।।
Shri Khatu Shyam Chalisa
Shri Khatu Shyam Chalisa

|| चौपाई ||

श्याम श्याम भजि बारम्बारा, 
सहज ही हो भवसागर पारा।
इन सम देव न दूजा कोई, 
दीन दयालु न दाता होई।

भीमसुपुत्र अहिलवती जाया, 
कहीं भीम का पौत्र कहाया।
यह सब कथा सही कल्पान्तर, 
तनिक न मानों इनमें अन्तर।


बर्बरीक विष्णु अवतारा, 
भक्तन हेतु मनुज तनु धारा।
वसुदेव देवकी प्यारे, 
यशुमति मैया नन्द दुलारे।


मधुसूदन गोपाल मुरारी, 
बृजकिशोर गोवर्धन धारी।
सियाराम श्री हरि गोविन्दा, 
दीनपाल श्री बाल मुकुन्दा।


दामोदर रणछोड़ बिहारी, 
नाथ द्वारिकाधीश खरारी।
नरहरि रूप प्रहलद प्यारा, 
खम्भ फारि हिरनाकुश मारा।


राधा वल्लभ रुक्मिणी कंता, 
गोपी बल्लभ कंस हनंता।
मनमोहन चितचोर कहाये, 
माखन चोरि चोरि कर खाये।


मुरलीधर यदुपति घनश्याम, 
कृष्ण पतितपावन अभिराम।
मायापति लक्ष्मीपति ईसा, 
पुरुषोत्तम केशव जगदीशा।


विश्वपति त्रिभुवन उजियारा, 
दीनबन्धु भक्तन रखवारा।
प्रभु का भेद कोई न पाया, 
शेष महेश थके मुनियारा।


नारद शारद ऋषि योगिन्दर, 
श्याम श्याम सब रटत निरन्तर।
कवि कोविद करि सके न गिनन्ता, 
नाम अपार अथाह अनन्ता।


हर सृष्टि हर युग में भाई, 
ले अवतार भक्त सुखदाई।
हृदय माँहि करि देखु विचारा, 
श्याम भजे तो हो निस्तारा।


कीर पड़ावत गणिका तारी, 
भीलनी की भक्ति बलिहारी।
सती अहिल्या गौतम नारी, 
भई श्राप वश शिला दुखारी।


श्याम चरण रच नित लाई, 
पहुँची पतिलोक में जाई।
अजामिल अरु सदन कसाई, 
नाम प्रताप परम गति पाई।


जाके श्याम नाम अधारा, 
सुख लहहि दुख दूर हो सारा।
श्याम सुलोचन है अति सुन्दर, 
मोर मुकुट सिर तन पीताम्बर।


गल वैजयन्तिमाल सुहाई, 
छवि अनूप भक्तन मन भाई।
श्याम श्याम सुमिरहुं दिनराती, 
शाम दुपहरि अरु परभाती।


श्याम सारथी सिके रथ के, 
रोड़े दूर होय उस पथ के।
श्याम भक्त न कहीं पर हारा, 
भीर परि तब श्याम पुकारा।


रसना श्याम नाम पी ले, 
जी ले श्याम नाम के हाले।
संसारी सुख भोग मिलेगा, 
अन्त श्याम सुख योग मिलेगा।


श्याम प्रभु हैं तन के काले, 
मन के गोरे भोले भाले।
श्याम संत भक्तन हितकारी, 
रोग दोष अघ नाशै भारी।


प्रेम सहित जे नाम पुकारा, 
भक्त लगत श्याम को प्यारा।
खाटू में है मथुरा वासी, 
पार ब्रह्म पूरण अविनासी।


सुधा तान भरि मुरली बजाई, 
चहुं दिशि नाना जहाँ सुनि पाई।
वृद्ध बाल जेते नारी नर, 
मुग्ध भये सुनि वंशी के स्वर।


दौड़ दौड़ पहुँचे सब जाई, 
खाटू में जहाँ श्याम कन्हाई।
जिसने श्याम स्वरूप निहारा, 
भव भय से पाया छुटकारा।


|| दोहा ||

श्याम सलोने साँवरे, बर्बरीक तनु धार।
इच्छा पूर्ण भक्त की, करो न लाओ बार।

Shyam Chalisa

Khatu Shyam Temple

~~ Doha ~~

Shri Guru Charan Dhyan Dhar,
Sumiri Sachchidanand.
Shyam Chalisa Bhajat Hun,
Rach Choupai Chand.

~~ Chaupai ~~

Shyam Shyam Bhaji Barambara,
Sahaj Hi Ho Bhawsaagar Para.
In Sam Dev Na Duja Koi,
Din Dayalu Na Data Hoi.

BhimSuputra Ahilwati Jaya,
Kahin Bhim Ka Pautra Kahaya.
Yah Sab Katha Sahi Kalpantar,
Tanik Na Mano Inme Antar.


Barbrik Vishnu Awtara,
Bhaktan Hetu Manuj Tanu Dhara.
Wasudev Devki Pyare,
Yashumati Maiya Nand Dulare.


Madhusudan Gopal Murari,
Brijkishor Gowardhan Dhari.
SiyaRam Shri Hari Govinda,
Dinpaal Shri Bal Mukunda.


Damodar RanChhor Bihari,
Nath Dwarikadhish Kharari.
NarHari Rup Prahalad Pyara,
Khambh Phari Hirnakush Mara.


Radha Ballabh Rukmani Kanta,
Gopi Ballabh Kans Hananta.
Manmohan ChitChor Kahaye,
Makhan Chori Chori Kar Khaye.


MurliDhar Yadupati Ghanshyam,
Krishn PatitPaawan Abhiram.
MayaPati LakshmiPati Isha,
Purushottam Keshaw Jagdisha.


Wishwapati Tribhuwan Ujiyara,
DinBandhu Bhaktan Rakhwara.
Prabhu Ka Bhed Koi Na Paya.
Shesh Mahesh Thake Muniyara.


Narad Sharad Rishi Yogindar,
Shyam Shyam sab Ratat Nirantar.
Kavi Kovid Kari Sake Na Ginanta,
Naam Apar Athah Ananata.


Har Srishti har Yug Me Bhai,
Le Awtar Bhakt Sukhdai.
Hriday Maanhi Kari Dekhu Wichara,
Shyam Bhaje To Ho Nistara.


Kir Padawat Ganika Tari,
Bhilni Ki Bhakti Balihari.
Sati Ahilya Gautam Naari,
Bhai Shrap Wash Shila Dukhari.


Shyam Charan Rach Nit Laai,
Pahunchi Patitlok Me Jaai.
Ajamil Aru Sadan Kasai,
Naam Pratap Param Gati Paai.


Jake Shyam Naam Adhara,
Sukh Lahahi Dukh Dur Ho Sara.
Shyam Sulochan Hai Ati Sundar,
Mor Mukut Sir Tan Pitambar.


Gal WaijayantiMal Suhai,
Chawi Anup Bhaktan Man Bhai.
Shyam Shyam Sumirahun Din Rati,
Shaam Dupahari Aru Parbhati.


Shyam Sarathi Sike Rath Ke,
Rode Dur Hoy Us Path Ke.
Shyam Bhakt Na Kahi Par hara,
Bhir Pari Tab Shyam Pukara.


Rasna Shyam Naam Pi Le,
Ji Le Shyam Naam Ke Haale.
Sansari Sukh Bhog Milega,
Ant Shyam Sukh Yog Milega.


Shyam Prabhu Hain tan Ke Kale,
Man Ke Gore Bhole Bhale.
Shyam Sant Bhaktan Hitkari,
Rog Dosh Agh Nashe Bhari.


Prem Sahit Je Naam Pukara,
Bhakt Lagat Shyam Ko Pyara.
Khatu Me Hai Mathura Wasi, 
Par Brahm Puran Awinashi.


Sudha Taan Bhari Murali bajai,
Chahun Dishi Nana Jahan Suni Paai.
Bridh Baal Jete naari nar,
Mugdh Bhaye Suni wanshi Ke Swar.


Daud Daud pahunche sab Jai,
Khatu Me Jahan Shyam Kanhai.
Jisne Shyam Swarup Nihara,
Bhaw Bhay Se Paya Chutkara.


~~ Doha ~~

Shyam salone Saanwre, Barbrik tanu Dhar.
Ichcha Purn Bhakt Ki, Karo Na Lao Bar.


Khatu Shyam Chalisa Benefits

खाटू श्याम बाबा चालीसा पाठ से लाभ

श्री खाटू श्याम बाबा के चालीसा ( Shyam Chalisa ) के पाठ से ब्यक्ति को श्री श्याम जी की परम कृपा की प्राप्ति होती है.
श्याम बाबा की कृपा से मनुष्य के जीवन में सुख और समृद्धि आती है.
सभी प्रकार के संकटों से बाबा श्याम अपने भक्त की रक्षा करतें हैं.
जीवन में सफलता बाबा श्याम की कृपा से मिलती है.

Shri Khatu Shyam Chalisa PDF download

Shyam Chalisa
Shri Shyam Chalisa

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श्री खाटू श्याम जी के चालीसा को पीडीऍफ़ में डाउनलोड करने के लिए आप निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें. इससे आप डाउनलोड वाले page पर पहुँच जायेंगे. जिसके अंत में आपको पीडीऍफ़ डाउनलोड का बटन मिलेगा. जहाँ से आप श्री श्याम चालीसा को खुबसूरत तस्वीरों के साथ पीडीऍफ़ में डाउनलोड कर सकतें हैं.


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October 30, 2019

Shri Ram Chalisa PDF Download

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श्री राम चन्द्र जी के चालीसा को पीडीऍफ़ में डाउनलोड करने के लिए आप निचे दिए गए डाउनलोड बटन को क्लिक करें. क्लिक करने से सीधे श्री राम चालीसा डाउनलोड हो जायेगी.




October 30, 2019

Shri Ram Chalisa | Lyrics | PDF | Video | Download | श्री राम चालीसा

श्री राम चालीसा ( Shri Ram Chalisa ) भगवान श्री राम जी की आराधना करने का एक बहुत ही उत्तम माध्यम है. जो भी सच्चे ह्रदय से भगवान श्री राम जी के चालीसा ( Ram Chalisa )  का पाठ करता है. उसे भगवान श्री राम जी की कृपा प्राप्ति होती है.
इस अंक में आप लोगों को श्री राम चालीसा हिंदी ( Ram Chalisa Hindi ) और इंग्लिश ( Ram Chalisa English ) में मिलेगी. इसे आप डाउनलोड करके रख सकतें हैं.

डाउनलोड करने का बटन निचे दिया गया है.

Shri Ram Chalisa

Shri Ram Chalisa
Shri Ram Chalisa

||श्री राम चालीसा ||

|| चौपाई ||


श्री रघुवीर भक्त हितकारी| 


सुन लीजै प्रभु अरज हमारी||

निशिदिन ध्यान धरै जो कोई| 

ता सम भक्त और नहिं होई||

ध्यान धरे शिवजी मन माहीं|

ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं||

दूत तुम्हार वीर हनुमाना|

जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना||

Ram chalisa
Ram Chalisa


श्री राम चालीसा 

तब भुज दण्ड प्रचण्ड कृपाला|

रावण मारि सुरन प्रतिपाला||

तुम अनाथ के नाथ गुंसाई| 

दीनन के हो सदा सहाई||

ब्रह्मादिक तव पारन पावैं| 

सदा ईश तुम्हरो यश गावैं||

चारिउ वेद भरत हैं साखी| 

तुम भक्तन की लज्जा राखीं||

गुण गावत शारद मन माहीं|

सुरपति ताको पार न पाहीं||

नाम तुम्हार लेत जो कोई|

ता सम धन्य और नहिं होई||

राम नाम है अपरम्पारा|

चारिहु वेदन जाहि पुकारा||

गणपति नाम तुम्हारो लीन्हो|

तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हो||

Shri ram chandra Chalisa
Shri Ram Chandra Chalisa


शेष रटत नित नाम तुम्हारा| 

महि को भार शीश पर धारा||

फूल समान रहत सो भारा| 

पाव न कोऊ तुम्हरो पारा||

भरत नाम तुम्हरो उर धारो| 

तासों कबहुं न रण में हारो||

नाम शक्षुहन हृदय प्रकाशा|

सुमिरत होत शत्रु कर नाशा||

लखन तुम्हारे आज्ञाकारी| 

सदा करत सन्तन रखवारी||

ताते रण जीते नहिं कोई|

युद्घ जुरे यमहूं किन होई||

महालक्ष्मी धर अवतारा|

सब विधि करत पाप को छारा||

सीता राम पुनीता गायो| 

भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो||

घट सों प्रकट भई सो आई|

जाको देखत चन्द्र लजाई||

सो तुमरे नित पांव पलोटत| 

नवो निद्घि चरणन में लोटत||

सिद्घि अठारह मंगलकारी| 

सो तुम पर जावै बलिहारी||

औरहु जो अनेक प्रभुताई| 

सो सीतापति तुमहिं बनाई||

इच्छा ते कोटिन संसारा|

रचत न लागत पल की बारा||

राम चालीसा
श्री राम चन्द्र जी 


जो तुम्हे चरणन चित लावै| 

ताकी मुक्ति अवसि हो जावै||

जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरूपा| 

नर्गुण ब्रह्म अखण्ड अनूपा||

सत्य सत्य जय सत्यव्रत स्वामी|

सत्य सनातन अन्तर्यामी||

सत्य भजन तुम्हरो जो गावै| 

सो निश्चय चारों फल पावै||

सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं| 

तुमने भक्तिहिं सब विधि दीन्हीं||

सुनहु राम तुम तात हमारे|

तुमहिं भरत कुल पूज्य प्रचारे||

तुमहिं देव कुल देव हमारे|

तुम गुरु देव प्राण के प्यारे||

जो कुछ हो सो तुम ही राजा|

जय जय जय प्रभु राखो लाजा||

राम आत्मा पोषण हारे| 

जय जय दशरथ राज दुलारे||

ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरूपा| 

नमो नमो जय जगपति भूपा||

धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा| 

नाम तुम्हार हरत संतापा||

सत्य शुद्घ देवन मुख गाया|

बजी दुन्दुभी शंख बजाया||

सत्य सत्य तुम सत्य सनातन|

तुम ही हो हमरे तन मन धन||

याको पाठ करे जो कोई| 

ज्ञान प्रकट ताके उर होई||

आवागमन मिटै तिहि केरा|

सत्य वचन माने शिर मेरा||

और आस मन में जो होई| 

मनवांछित फल पावे सोई||

तीनहुं काल ध्यान जो ल्यावै|

तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै||

साग पत्र सो भोग लगावै| 

सो नर सकल सिद्घता पावै||

अन्त समय रघुबरपुर जाई| 

जहां जन्म हरि भक्त कहाई||

श्री हरिदास कहै अरु गावै|

सो बैकुण्ठ धाम को पावै||

राम चालीसा
श्री राम 


|| दोहा||

सात दिवस जो नेम कर,

पाठ करे चित लाय|

हरिदास हरि कृपा से,

अवसि भक्ति को पाय||

राम चालीसा जो पढ़े, 

राम चरण चित लाय|

जो इच्छा मन में करै, 

सकल सिद्घ हो जाय||

||इतिश्री प्रभु श्रीराम चालीसा समाप्त:||

Ram Chalisa


Ram Chalisa Hindi
Ram Chalisa

|| Chaupai ||

Shri Raghubir bhakt hitkari,
Suni lije prabhu araj hamari.

Nisidin dhyan dhare jo koi,
Ta sam bhakt aur nahi hoi.

Dhyan dhare shivji man mahi,
Brahma indra par nahi pahi.

Jai jai jai raghunath kripala,
Sada karo santan pratipala.

Doot tumhar veer hanumana,
Jasu prabhav tihu pur jana.

Tuv bhujdand prachand kripala,
Ravan mari suarn pratipala.


Tum anath ke nath gosai,
Deenan ke ho sada sahai.

Bramhadik tav par na paven,

Sada eesh tumharo yash gave.

Chariu ved bharat hai sakhi,
Tum bhaktan ki lajja rakhi.

Gun gavat sharad man mahi,

Surpati tako par na pahi.


Nam tumhare let jo koi,
Ta sam dhanya aur nahi hoi.

Ram naam hai aparampara,

Charin ved jahi pukara.

Ganpati naam tumharo linho,
Tinko pratham pujya tum kinho.

Shesh ratat nit naam tumhara,
Mahi ko bhar shish par dhara.


Phool saman rahat so bhara,
Pavat kou na tumharo para.

Bharat naam tumharo ur dharo,
Taso kabahu na ran mein haro.

Naam shatrugna hridaya prakasha,
Sumirat hot shatru kar nasha.

Lakhan tumhare agyakari,
Sada karat santan rakhwari.


Tate ran jeete nahi koi,
Yuddh jure yamahu kin hoi.

Mahalakshmi dhar avtara,
Sab vidhi karat paap ko chhara.

Seeta ram puneeta gayo,
Bhuvaneshwari prabhav dikhayo.

Ghat sp prakat bhai so aai,
Jako dehkat chand lajai.

Shri Ram Chalisa Lyrics
Shri Ram Chalisa Lyrics



So tumhare nit paon palotat,
Navo nidhi charanan mein lotat.

Siddhi atharah mangalkari,
So tum par jave balihari.

Aurahu jo anek prabhutai,
So seetapati tumahi banai.

Ichchha te kotin sansara,
Rachat na lagat pal ki bhara.


Jo tumhare charanan chit lave,
Taki mukti avasi ho jave.

Sunahu ram tum tat hamare,
Tumahi bharat kul poojya prachare.

Tumahi dev kul dev hamare,
Tum gurudev pran ke pyare.

Jo kuch ho so tumhahi raja,
Jai jai jai prabhu rakho laja.


Ram atma poshan hare,

Jai jai jai dasrath ke pyare.

Jai jai jai prabhu jyoti swarupa,
Nirgun brahma akhand anoopa.


Satya satya jai satyavrat swami,
Satya sanatan antaryami.

Satya bhajan tumharo jo gave,
So nischay charon phal pave.

Satya sapath gauripati kinhi,
Tumne bhaktahi sab siddhi dinhi.

Gyan hridaya do gyanswarupa,

Namo namo jai jagpati bhoopa.

Dhanya dhanya tum dhanya pratapa,
Naam tumhar harat sntapa.

Satya shudh deva mukh gaya,
Baji dundubhi shankh bajaya.

Satya satya tum satya sanatan,
Tumahi ho hamare tan man dhan.

Yako path kare jo koi,

Gyan prakat take ur hoi.


Avagaman mitai tihi kera,
Satya vachan mane shiv mera.

Aur aas man mein jo hoi,
Manvanchit phal pave soi.

Teenahu kal dhyan jo lave,

Tulsidas anu phool chadhave.

Saag patra so bhog lagave,
So nar sakal siddhata pave.

Shri ram Chandra Ji Image
Jai Shri ram


Aant samay raghubarpur jai,

Jaha janma haribhakta kai.

Shri haridas kahai aru gave,
So vaikunth dham ko pave.

Saat divas jo nem kar,
Path kare chit laye.

Haridas harikripa se,
Avasi bhakti ko pave.


Ram chalisa jo padhe,
Ram sharan chit laye.

Jo ichchha man mein kare,

Sakal siddh ho jaye.

श्री राम चालीसा का पाठ कैसे करें?

How to Recite Shri Ram Chalisa?

1. श्री राम चालीसा ( Shri Ram Chalisa ) का पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है.
2. सम्पूर्ण श्रद्धा और ह्रदय में राम जी को बसा कर ही श्री राम चालीसा का पाठ करें.
3. स्नान आदि करने के पश्चात किसी सुद्ध आसन पर बैठें.
4. सामने भगवान प्रभु श्री राम चन्द्र जी की मूर्ती या तस्वीर को स्थापित करें.
5. धुप दीप जलाएं.
6. प्रभु श्री राम चन्द्र जी को पुष्प और पुष्प माला अर्पण करें.
7. उसके पश्चात सम्पूर्ण श्रद्धा के साथ श्री राम चालीसा ( Shri Ram Chandra Chalisa ) का पाठ करें.
8. चालीसा का पाठ करने के पश्चात भगवान शिर राम चन्द्र जी की आरती करें.

श्री राम चालीसा के पाठ से लाभ

1. प्रभु श्री राम चन्द्र जी की चालीसा ( Shri Ram Chandra Ji Chalisa )  के पाठ से भगवान श्री राम चन्द्र जी की परम कृपा मनुष्य को प्राप्त होती है.
2. भगवान श्री राम चन्द्र जी भक्त वत्सल हैं. वे सदा अपने भक्तो की सहायता करतें हैं.
3. प्रभु श्री राम चन्द्र जी की कृपा से मनुष्य का सभी तरह के संकटों से बचाव होता है.
4. जीवन में सदा खुशहाली बनी रहती है.
5. सकारत्मक उर्जा चारों ओर प्रवाहित होती रहती है.
6. आत्म बिस्वास में बृद्धि होती है. जिससे मनुष्य अच्छे कर्म करता है.
7. जीवन में सफलता मिलती है.
8. किसी भी कार्य को करने का आत्म - बिस्वास मिलता है.

Ganesh Chalisa | गणेश चालीसा 

Shri Ram Chalisa Download

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श्री राम चालीसा को पीडीऍफ़ में डाउनलोड करने के लिए निचे दिए गए डाउनलोड बटन पर क्लिक करें.



श्री राम चन्द्र जी के चालीसा के प्रकाशन में हमने पूर्ण सावधानी राखी है. फिर भी अगर कहीं क्पोई त्रुटी आप गों को दिखाई दे तो कृपया हमें कमेंट करें. हम उसे निश्चय ही सुधार करेंगे. अगर आपकी कोई सुझाव या सलाह हो तो हमें अवस्य कमेंट करें. हम आपके सुझाव पर अवस्य ध्यान देंगे.
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July 04, 2019

Shani Chalisa | श्री शनि देव चालीसा | Download

Shani Chalisa | श्री शनि देव चालीसा भगवान श्री शनि देव की कृपा प्राप्ति का महा मन्त्र है. भगवान श्री शनि देव की कृपा प्राप्ति के लिए प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को Shani Chalisa | शनि देव की चालीसा का पाठ अवस्य करें.
इससे आप पर शनि देव की कृपा बनी रहेगी. साथ ही शनि की साढ़े साती और ढहिया से मुक्ति मिलेगी.
शनि चालीसा एक बहुत ही शक्ति शाली मन्त्र है. इसके जाप सदा ही शुभ फलदायी  सिद्ध होता है. शनि देव की वक्र दृष्टि यह शनि चालीसा बचाती है.
एक बात और मैं आप लोगों का बताना चाहता हूँ की शनि देव इस जगत के न्यायाधीश हैं. वे हमें हमारे कर्मो का फल देते हैं. अगर हमारे कर्म बुरे हैं तो वे हमें दण्ड देतें हैं. इसलिय हमेशा अच्छे कर्म करें. अगर आपसे जाने अनजाने कोई बुरा कर्म हो चूका है. तो सच्चे दिल से शनि देव से क्षमा याचना करें और भविष्य में कभी भी कोई बुरा कर्म नहीं करें.
तभी जाकर आपको शनि देव की कृपा प्राप्ति होगी. शनि चालीसा का पाठ भी करेंगे और बुरे कर्म भी करेंगे तो आपको इसका कोई भी फल प्राप्त नहीं होगा. इसलिए शनि चालीसा के पाठ के साथ ही हमेशा अच्छे कर्म करें.



Shani Chalisa Hindi

शनि चालीसा
shani chalisa in hindi
Shani Dev


॥दोहा॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।

दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।

करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

॥चौपाई॥

जयति जयति शनिदेव दयाला । 
करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै । 
माथे रतन मुकुट छवि छाजै ॥

परम विशाल मनोहर भाला । 
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके । 
हिये माल मुक्तन मणि दमके ॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा । 
पल बिच करैं अरिहिं संहारा ॥

पिंगल, कृष्णों, छाया, नन्दन । 
यम, कोणस्थ, रौद्र, दुःख भंजन ॥

सौरी, मन्द, शनि, दशनामा । 
भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥

जा पर प्रभु प्रसन्न है जाहीं । 
रंकहुं राव करैं क्षण माहीं ॥

पर्वतहू तृण होई निहारत । 
तृणहू को पर्वत करि डारत ॥

राज मिलत वन रामहिं दीन्हो । 
कैकेइहुं की मति हरि लीन्हो ॥

बनहूं में मृग कपट दिखाई । 
मातु जानकी गई चतुराई ॥

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा । 
मचिगा दल में हाहाकारा ॥

रावण की गति मति बौराई । 
रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई ॥

दियो कीट करि कंचन लंका । 
बजि बजरंग बीर की डंका ॥

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा । 
चित्र मयूर निगलि गै हारा ॥

हार नौलाखा लाग्यो चोरी । 
हाथ पैर डरवायो तोरी ॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो । 
तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो ॥

विनय राग दीपक महँ कीन्हों । 
तब प्रसन्न प्रभु हवै सुख दीन्हों ॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी । 
आपहुं भरे डोम घर पानी ॥

तैसे नल पर दशा सिरानी । 
भूंजी-मीन कूद गई पानी ॥

श्री शंकरहि गहयो जब जाई । 
पार्वती को सती कराई ॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा । 
नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा ॥

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी । 
बची द्रोपदी होति उधारी ॥

कौरव के भी गति मति मारयो । 
युद्ध महाभारत करि डारयो ॥

रवि कहं मुख महं धरि तत्काला । 
लेकर कूदि परयो पाताला ॥

शेष देव-लखि विनती लाई । 
रवि को मुख ते दियो छुड़ई ॥

वाहन प्रभु के सात सुजाना । 
जग दिग्ज गर्दभ मृग स्वाना ॥

जम्बुक सिंह आदि नख धारी । 
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी ॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं । 
हय ते सुख सम्पत्ति उपजावै ॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा । 
गर्दभ सिंद्धकर राज समाजा ॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै । 
मृग दे कष्ट प्राण संहारै ॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी । 
चोरी आदि होय डर भारी ॥

तैसहि चारि चरण यह नामा । 
स्वर्ण लौह चाँजी अरु तामा ॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं । 
धन जन सम्पत्ति नष्ट करावै ॥

समता ताम्र रजत शुभकारी । 
स्वर्ण सर्वसुख मंगल कारी ॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै । 
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ॥

अदभुत नाथ दिखावैं लीला । 
करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई । 
विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत । 
दीप दान दै बहु सुख पावत ॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा । 
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ॥

॥दोहा॥

पाठ शनिश्चर देव को, की हों विमल तैयार ।

करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार ॥

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Shani dev

Shani Chalisa

Doha

Jai Ganesh Girija suwan,
Mangal karan kripal.
Dinan ke dukh dur kari,
Kije nath nihal.
Jai Jai Shri Shanidev prabhu,
Sunah vinay maharaj.
Karah kripa he Ravi tanay,
Rakhah jan ki laaj.

Chaupai


Jayati jayati Shanidev dayala.
Karat sada Bhaktan Pratipala.

Chari bhuja, Tanu Shyam biraje,
Mathe ratan mukut chawi chhaje.


Param wishal manohar bhala,
Tedhi drishti bhrikuti wikrala.

Kundal shrawan chamacham chamke,
Hiye mal muktan mani damke.

Kar me gada trishul kuthara,
Pal bich kare arihi sanhara.

Pingal,Krishna, Chaya nandan,
Yam, Konashth, Raudra, Dukh bhanjan.

Sauri, Mand, Shani Dashnama,
Bhanu putra pujahin sab kama.

Ja par Prabhu Prasann he jaahin,
Rankah raaw karen kshan maahin.

Parwtah tan hoi niharat,
Tanah ko parwat kari daarat.

Raj milat wan Ramhi dinho,
Kaikeihn ki mati hari linho.

banhn me mrig kapat dikhai,
Maatu Jaanki gai chaturai.

Lakhanhi shakti wikal karidara,
Machinga dal me hahakara.

Raawan ki gati mati baurai,
Ramchandra sou bair badhai.

Diyo kit kari kanchan Lanka,
Baji Bajrang bir ki danka.

Nap wikram par tuhi pagu dhara,
Chitra mayur nigali gai hara.

Har naulakha laagyo chori,
Haath pair darwaayo tori.

Bhari dasha nikrisht dikhayo,
Telihin ghar kolh chalwaayo.

Vinay rag deepak mahn kinho,
Tab prasann prabhu hawe sukh dinho.

Harishchandra nrip naari bikani,
Aapahn bhare dom ghar paani.

Tese nal par dasha sirani,
Bhunji min kud gai paani.

Shri Shankarhi gahyo jab jai,
Paarwati ko sati karai.

Tanik wilokat hi kari risa,
nabh udi gayo gaurisut sisa.

Paandaw par bai dasha tumhari,
Bachi Dropadi hoti udhari.

Kaurav ke bhi gati mati maaryo,
Yuddh Mahabharat kari Daaryo.

Ravi kahn mukh mahn dhari Tatkala,
Lekar kudi paryo patala.

Shesh dev lakhi winti laai,
ravi ko mukh te diyo chhudai.

Waahan Prabhu ke saath sujana,
Jag digj gadarbh mrig swana.

Jambuk sinh aadi nakh dhari,
So phal jyotish kahat pukari.

Gaj waahan lakshmi grih aawen,
Hai te sukh sampati upjaawe.

Gadarbh haani kare wah kaja,
Gadarbh siddhkar raj samaja.

Jambuk buddhi nasht kar daare,
Mrig de kasht pran sanhare.

Jab aawahi Prabhu swan sawari,
Chori aadi hoy dar bhaari.

Tesahi chari charan yah nama,
Swarn louh chaunji aru tama.

Louh charan par jab prabhu aawen,
Dhan jan sampati nasht karawe.

Samta taamra rajat shubhkari,
Swarn sarvsukh mangal kaari.

Jo yah Shani Charitra nit gaawe,
Kabah n dasha nikrisht satawe.

Adbhut naath dikhawen lila,
Karen shatru ke nashi bali dhila.

Jo pandit suyogya bulwai,
Widhiwat Shani grah shaanti karai.

Pipal jal Shani diwas chadhawat,
Deep dan de wah sukh paawat.

Kahat Ram sundar prabhu dasa,
Shani sumirat sukh hot prakasha.

Doha


Paath Shanishchar Dev ko, ki haan bimal taiyar.
Karat path Chalis din, Ho Bhawsagar par.

Shani Chalisa Samapt.