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Shani Chalisa | श्री शनि देव चालीसा | Download

Shani Chalisa | श्री शनि देव चालीसा भगवान श्री शनि देव की कृपा प्राप्ति का महा मन्त्र है. भगवान श्री शनि देव की कृपा प्राप्ति के लिए प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को Shani Chalisa | शनि देव की चालीसा का पाठ अवस्य करें.
इससे आप पर शनि देव की कृपा बनी रहेगी. साथ ही शनि की साढ़े साती और ढहिया से मुक्ति मिलेगी.
शनि चालीसा एक बहुत ही शक्ति शाली मन्त्र है. इसके जाप सदा ही शुभ फलदायी  सिद्ध होता है. शनि देव की वक्र दृष्टि यह शनि चालीसा बचाती है.
एक बात और मैं आप लोगों का बताना चाहता हूँ की शनि देव इस जगत के न्यायाधीश हैं. वे हमें हमारे कर्मो का फल देते हैं. अगर हमारे कर्म बुरे हैं तो वे हमें दण्ड देतें हैं. इसलिय हमेशा अच्छे कर्म करें. अगर आपसे जाने अनजाने कोई बुरा कर्म हो चूका है. तो सच्चे दिल से शनि देव से क्षमा याचना करें और भविष्य में कभी भी कोई बुरा कर्म नहीं करें.
तभी जाकर आपको शनि देव की कृपा प्राप्ति होगी. शनि चालीसा का पाठ भी करेंगे और बुरे कर्म भी करेंगे तो आपको इसका कोई भी फल प्राप्त नहीं होगा. इसलिए शनि चालीसा के पाठ के साथ ही हमेशा अच्छे कर्म करें.



Shani Chalisa Hindi

शनि चालीसा
shani chalisa in hindi
Shani Dev


॥दोहा॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।

दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।

करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

॥चौपाई॥

जयति जयति शनिदेव दयाला । 
करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै । 
माथे रतन मुकुट छवि छाजै ॥

परम विशाल मनोहर भाला । 
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके । 
हिये माल मुक्तन मणि दमके ॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा । 
पल बिच करैं अरिहिं संहारा ॥

पिंगल, कृष्णों, छाया, नन्दन । 
यम, कोणस्थ, रौद्र, दुःख भंजन ॥

सौरी, मन्द, शनि, दशनामा । 
भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥

जा पर प्रभु प्रसन्न है जाहीं । 
रंकहुं राव करैं क्षण माहीं ॥

पर्वतहू तृण होई निहारत । 
तृणहू को पर्वत करि डारत ॥

राज मिलत वन रामहिं दीन्हो । 
कैकेइहुं की मति हरि लीन्हो ॥

बनहूं में मृग कपट दिखाई । 
मातु जानकी गई चतुराई ॥

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा । 
मचिगा दल में हाहाकारा ॥

रावण की गति मति बौराई । 
रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई ॥

दियो कीट करि कंचन लंका । 
बजि बजरंग बीर की डंका ॥

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा । 
चित्र मयूर निगलि गै हारा ॥

हार नौलाखा लाग्यो चोरी । 
हाथ पैर डरवायो तोरी ॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो । 
तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो ॥

विनय राग दीपक महँ कीन्हों । 
तब प्रसन्न प्रभु हवै सुख दीन्हों ॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी । 
आपहुं भरे डोम घर पानी ॥

तैसे नल पर दशा सिरानी । 
भूंजी-मीन कूद गई पानी ॥

श्री शंकरहि गहयो जब जाई । 
पार्वती को सती कराई ॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा । 
नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा ॥

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी । 
बची द्रोपदी होति उधारी ॥

कौरव के भी गति मति मारयो । 
युद्ध महाभारत करि डारयो ॥

रवि कहं मुख महं धरि तत्काला । 
लेकर कूदि परयो पाताला ॥

शेष देव-लखि विनती लाई । 
रवि को मुख ते दियो छुड़ई ॥

वाहन प्रभु के सात सुजाना । 
जग दिग्ज गर्दभ मृग स्वाना ॥

जम्बुक सिंह आदि नख धारी । 
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी ॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं । 
हय ते सुख सम्पत्ति उपजावै ॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा । 
गर्दभ सिंद्धकर राज समाजा ॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै । 
मृग दे कष्ट प्राण संहारै ॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी । 
चोरी आदि होय डर भारी ॥

तैसहि चारि चरण यह नामा । 
स्वर्ण लौह चाँजी अरु तामा ॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं । 
धन जन सम्पत्ति नष्ट करावै ॥

समता ताम्र रजत शुभकारी । 
स्वर्ण सर्वसुख मंगल कारी ॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै । 
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ॥

अदभुत नाथ दिखावैं लीला । 
करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई । 
विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत । 
दीप दान दै बहु सुख पावत ॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा । 
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ॥

॥दोहा॥

पाठ शनिश्चर देव को, की हों विमल तैयार ।

करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार ॥

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shani chalisa in hindi
Shani dev

Shani Chalisa

Doha

Jai Ganesh Girija suwan,
Mangal karan kripal.
Dinan ke dukh dur kari,
Kije nath nihal.
Jai Jai Shri Shanidev prabhu,
Sunah vinay maharaj.
Karah kripa he Ravi tanay,
Rakhah jan ki laaj.

Chaupai


Jayati jayati Shanidev dayala.
Karat sada Bhaktan Pratipala.

Chari bhuja, Tanu Shyam biraje,
Mathe ratan mukut chawi chhaje.


Param wishal manohar bhala,
Tedhi drishti bhrikuti wikrala.

Kundal shrawan chamacham chamke,
Hiye mal muktan mani damke.

Kar me gada trishul kuthara,
Pal bich kare arihi sanhara.

Pingal,Krishna, Chaya nandan,
Yam, Konashth, Raudra, Dukh bhanjan.

Sauri, Mand, Shani Dashnama,
Bhanu putra pujahin sab kama.

Ja par Prabhu Prasann he jaahin,
Rankah raaw karen kshan maahin.

Parwtah tan hoi niharat,
Tanah ko parwat kari daarat.

Raj milat wan Ramhi dinho,
Kaikeihn ki mati hari linho.

banhn me mrig kapat dikhai,
Maatu Jaanki gai chaturai.

Lakhanhi shakti wikal karidara,
Machinga dal me hahakara.

Raawan ki gati mati baurai,
Ramchandra sou bair badhai.

Diyo kit kari kanchan Lanka,
Baji Bajrang bir ki danka.

Nap wikram par tuhi pagu dhara,
Chitra mayur nigali gai hara.

Har naulakha laagyo chori,
Haath pair darwaayo tori.

Bhari dasha nikrisht dikhayo,
Telihin ghar kolh chalwaayo.

Vinay rag deepak mahn kinho,
Tab prasann prabhu hawe sukh dinho.

Harishchandra nrip naari bikani,
Aapahn bhare dom ghar paani.

Tese nal par dasha sirani,
Bhunji min kud gai paani.

Shri Shankarhi gahyo jab jai,
Paarwati ko sati karai.

Tanik wilokat hi kari risa,
nabh udi gayo gaurisut sisa.

Paandaw par bai dasha tumhari,
Bachi Dropadi hoti udhari.

Kaurav ke bhi gati mati maaryo,
Yuddh Mahabharat kari Daaryo.

Ravi kahn mukh mahn dhari Tatkala,
Lekar kudi paryo patala.

Shesh dev lakhi winti laai,
ravi ko mukh te diyo chhudai.

Waahan Prabhu ke saath sujana,
Jag digj gadarbh mrig swana.

Jambuk sinh aadi nakh dhari,
So phal jyotish kahat pukari.

Gaj waahan lakshmi grih aawen,
Hai te sukh sampati upjaawe.

Gadarbh haani kare wah kaja,
Gadarbh siddhkar raj samaja.

Jambuk buddhi nasht kar daare,
Mrig de kasht pran sanhare.

Jab aawahi Prabhu swan sawari,
Chori aadi hoy dar bhaari.

Tesahi chari charan yah nama,
Swarn louh chaunji aru tama.

Louh charan par jab prabhu aawen,
Dhan jan sampati nasht karawe.

Samta taamra rajat shubhkari,
Swarn sarvsukh mangal kaari.

Jo yah Shani Charitra nit gaawe,
Kabah n dasha nikrisht satawe.

Adbhut naath dikhawen lila,
Karen shatru ke nashi bali dhila.

Jo pandit suyogya bulwai,
Widhiwat Shani grah shaanti karai.

Pipal jal Shani diwas chadhawat,
Deep dan de wah sukh paawat.

Kahat Ram sundar prabhu dasa,
Shani sumirat sukh hot prakasha.

Doha


Paath Shanishchar Dev ko, ki haan bimal taiyar.
Karat path Chalis din, Ho Bhawsagar par.

Shani Chalisa Samapt.