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Hanuman Mantra : हनुमान जी के अत्यंत सार्थक मन्त्र जिनके जाप से सभी संकटों का निवारण हो जाता है.

Hanuman Mantra


हनुमान जी अत्यंत दयालु हैं और सदा अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं.वे राम जी के परम भक्त हैं.वे शिव के रुद्रावतार हैं.उनकी आराधना से सारी संकटों का निवारण हो जाता है.उनके नाम मात्र के स्मरण से भय का नाश होता है. हनुमान जी अपने भक्तों की सदा सभी संकटों से रक्षा करतें हैं.
आज इस लेख में मैं आप सब लोगों को हनुमान जी कुछ सिद्ध मन्त्र बताने जा रहा हूँ जिनके जाप से अत्यंत शीघ्र लाभ होता है.इन मंत्रो को स्वच्छ होकर और अत्यंत विस्वास और श्रध्दा के साथ जाप करने से अतिशीघ्र मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.हनुमान जी के भक्तों से निवेदन है की वे इन मन्त्रों का जाप अत्यंत श्रध्दा और भक्ति के साथ स्वच्छ तन और मन से करें और अनुकूल लाभ की प्राप्ति करें.
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हनुमान मन्त्र 

1. हनुमान मन्त्र : प्रणाम मन्त्र 

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानीनामग्रगण्यम् |
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातंनमामि ||

अर्थ : जो अतुल बल के धाम, सोने के पर्वत ( सुमेरु ) के समान कान्तियुक्त शरीरवाले, दैत्यरूपी वन को को ध्वंस करने के लिये अग्निरूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, सम्पूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी और श्रीरघुनाथजी के प्रिय भक्त हैं, उन पवनपुत्र श्रीहनुमानजी को मैं प्रणाम करता हूँ |

2. हनुमान मन्त्र  : हनुमद्-गायत्रीमन्त्र 

हनुमान जी के गायत्री मन्त्र का जाप अत्यंत शुभ फलदायक शिद्ध होता है.इस हनुमद्-गायत्री मन्त्र के जाप से साधक के सारे कष्टों का निवारण होता है और जीवन में सुख और समृधि आती है.

ॐ अञ्जनीजाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि, तन्नो हनुमान् प्रचोदयात् |

3. हनुमान मन्त्र : हनुमद्-अष्टाक्षर मन्त्र 

हनुमद्-अष्टाक्षर मन्त्र के जाप से साधक के समस्त भय का नाश होता है.इस हनुमद्-अष्टाक्षर मन्त्र के जाप से नकारात्मकता का नाश होकर चारों ओर सकारात्मकता प्रवाहित होती है.

ॐ ह्रांं ह्रींं ह्रूूंं ह्रैैं ह्रौंं ह्रः ॐ |

4. हनुमान मन्त्र  : हनुमद्-द्वादशाक्षर मन्त्र 

हनुमद्-द्वादशाक्षर मन्त्र का प्रत्येक मंगलवार को 108 बार जाप करना चाहिए.इस मन्त्र के जाप से पूर्व शरीर को स्वच्छ करके, मन के शांत कर लें. इस मन्त्र का जाप अत्यंत श्रद्धा और विश्वास के साथ करें.मूल मन्त्र का प्रत्येक मंगलवार को 108 बार जाप करने के बाद दूसरा मन्त्र जो मूल मन्त्र के निचे दिया गया है उसका जाप करना चाहिए.

ॐ हँँ हनुमते रुद्रात्मकाय हुँँ फट् |

मनोजवं मारुत-तुल्य-वेगं 
जितेन्द्रियंं बुद्धिमतां वरिष्ठम्  |
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं
श्रीरामदूतंं शरणम् प्रपद्दे  ||

5. हनुमान मन्त्र : हनुमद्-दशाक्षर मन्त्र

श्रीपवननन्दनाय स्वाहा |

6. हनुमान मन्त्र : शत्रु-संकट-निवारण हनुमान मन्त्र 

इस मन्त्र को सिद्ध कर लेने से शत्रु संकट और भय का निवारण हो जाता है.इस मन्त्र को यदि स्वच्छ रूप से पूर्ण विश्वास और श्रद्धा के साथ 1500 बार जाप कर लेने से यह मन्त्र शिद्ध हो जाता है. इस मन्त्र के शिद्ध हो जाने पर साधक को शत्रु और भय के संकटों से मुक्ति मिल जाती है.

ॐ पूर्वकपिमुखाय पञ्चमुखहनुमते टं टं टं टं टं सकलशत्रु-संहरणाय स्वाहा |

7. हनुमान मन्त्र : सफलता प्राप्ति हनुमान मन्त्र 

किसी कार्य में सफलता प्राप्ति और कार्यशिद्धि के लिए निचे दिए गए मन्त्र का नियमित जाप करना चाहिए.मन्त्र के जाप के समय मन में हनुमान जी के प्रति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखना चाहिये. इस मन्त्र को  भोजपत्र पर लाल चन्दन से लिखकर किसी यन्त्र या ताबीज में भरकर लाल धागे या सूत्र में बांधकर गले या दायें भुजा में धारण कर सकते हैं. यदि भोजपत्र उपलब्द्ध नहीं हो तो किसी स्वेत कागज़ पर लाल स्याही से भी लिखा जा सकता है.
ॐ नमो हनुमते सर्वग्रहान् भूतभविष्यद्वर्तमानान् दूरस्थ - समीपस्थान् छिन्धि छिन्धि भिन्धिभिन्धि सर्वकालदुष्टबुद्धीनुच्चाटयोच्चाटय परबलान् क्षोभय क्षोभय मम सर्वकार्याणि साधय साधय | ॐ नमो हनुमते ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं फट् | देहि ॐ शिव सिद्धिं, ॐ ह्रां ॐ ह्रीं ॐ ह्रूूूूं ॐ ह्रैं ॐ ह्रौं ॐ ह्रः स्वाहा |

8. हनुमान मन्त्र : सर्वविघ्ननिवारण हनुमान मन्त्र 

इस मन्त्र के जाप से जीवन में आने वाली सभी बिघ्न और बाधा का निवारण हो जाता है.जीवन में आने वाली संकटों से बचाने के लिए हनुमान जी के इस मन्त्र का जाप करना चाहिए.

ॐ नमो हनुमते परकृतयन्त्र-मन्त्र पराहंकार भूतप्रेत-पिशाच-परदृष्टिसर्वविघ्नटार्जनचेकुविद्धासर्वोग्रभयान् निवारय निवारय वध वध लुण्ठ लुण्ठ पच पच विलुञ्च विलुञ्च किलि किलि किलि सर्वकुयन्त्राणि दुष्टवाचं ॐ 
ह्रां ह्रीं ह्रूं फट् स्वाहा |

9. हनुमान मन्त्र : सर्वदुष्टग्रह निवारण हनुमान मन्त्र 

ॐ नमो हनुमते पाहि पाहि एहि एहि सर्वग्रहभूतानां शाकिनीडाकिनीनां विषमदुष्टानां सर्वेषामाकर्षयाकर्षय मर्दय मर्दय छेदय छेदय मृत्युं मारय मारय भयं शोषय शोषय प्रज्वल प्रज्वल भूतमण्डल-पिशाचमण्डल-निरसनाय भूतज्वर-प्रेतज्वर-चातुर्थिकज्वर-विष्णुज्वर-माहेश्वरज्वरान् छिन्धि छिन्धि भिन्धि भिन्धि अक्षिशूल-पक्षशूल-शिरोऽभ्यन्तरशूल-गूल्मशूल-पित्तवातशूल-ब्रह्-राक्षसकुल-पिशाचकुल-प्रबलनागकुल-च्छेदनं-विषं निर्विषं कुरु कुरु झटिति झटिति ॐ ह्रां सर्वदुष्ट-ग्रहान्निवारणाय स्वाहा | ॐ नमो हनुमते पवनपुत्राय वैश्र्वानरमुखाय पापदृष्टि-चोरदृष्टि-पाषण्डदृष्टिहनुमदाज्ञा स्फुरॐ स्वाहा |




नोट : उपरोक्त मन्त्रों के प्रकाशन में अतिरिक्त सावधानी वरती गयी है फिर भी किसी तरह की भूल के लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूँ.उपरोक्त मन्त्र हनुमान जी से सम्बंधित ग्रंथों से संगृहीत की गयी है.इन मन्त्रों का प्रभाव सभी साधकों पर अलग अलग पड़ता है.